बजरंग बाण पाठ | Hanuman Bajrang Baan PDF Download

Download PDF of Hanuman Bajrang Baan Paath (बजरंग बाण पाठ) Lyrics PDF in Hindi with Benefits

बजरंग बाण एक बहुत ही शक्तिशाली प्रार्थना है जो की हनुमान जी को समर्पित है बजरंग बाण का अर्थ है बजरंगबली जी का तीर या भगवान हनुमान। बजरंग बाण पाठ एक बहुत ही powerful prayer और मंत्र है जिसका उपयोग बुरी शक्तियों को भागने के लिए किया जाता है।

अब तक यह स्पष्ट नहीं है की Bajrang Baan किसने लिखा था कोई कहता है यह तुलसीदास ने लिखा था कोई कहता है तुलसीदास जी ने नहीं लिखा था।

लेकिन यह बहुत ही प्राचीन प्रार्थना है जिसे बजरंग बलि के भक्त रोज जप करते है इस पाठ को करने की सलाह रात को सोते समय और सुबह जल्दी उठकर दी जाती है।

बजरंग बाण का सच्चे मन से पाठ करने से आपके आस-पास की सभी नकारात्मक ऊर्जाएं दूर हो जाएंगी, और आपके जीवन में शांति और सद्भाव आएगा। शिव के रुद्र अवतार हनुमान की पूजा जीवन में किसी भी कठिनाई को दूर करने के लिए एक शक्ति और आत्मविश्वास देती है।

Shri Hanuman Bajrang Baan written by shri Goswami Tulsidas ji. Shri Hanuman Bajrang Baan is the most popular and Powerful devotional Prayer dedicated to Lord Hanuman. Shri Hanuman Bajrang Baan is the one who removes obstacles, and help us overcome all difficulties and All types of fears of our life. And Give us Power to find solutions to our Problems.

बजरंग बाण पाठ और चौपाई हिंदी में

॥ दोहा ॥

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान ॥

॥ चौपाई ॥

जय हनुमन्त सन्त हितकारी, सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।
जन के काज विलम्ब न कीजै, आतुर दौरि महा सुख दीजै।
जैसे कूदि सिन्धु महिपारा, सुरसा बदन पैठि विस्तारा ।
आगे जाय लंकिनी रोका, मारेहु लात गई सुरलोका ।

जाय विभीषन को सुख दीन्हा, सीता निरखि परमपद लीन्हा ।
बाग उजारि सिन्धु महं बोरा, अति आतुर जमकातर तोरा ।
अक्षय कुमार को मारि संहारा, लूम लपेट लंक को जारा ।
लाह समान लंक जरि गई, जय जय धुनि सुरपुर में भई ।

अब विलम्ब केहि कारन स्वामी, कृपा करहु उर अन्तर्यामी ।
जय जय लखन प्राण के दाता, आतुर होय दु:ख करहु निपाता ।
जै गिरिधर जै जै सुख सागर, सुर समूह समरथ भटनागर ।
ॐ हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले, बैरिहि मारू बज्र की कीले ।

गदा बज्र लै बैरिहिं मारो, महाराज प्रभु दास उबारो ।
ॐ कार हुंकार महाप्रभु धावो, बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो ।
ॐ ह्रिं ह्रिं ह्रिं हनुमन्त कपीसा, ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा ।
सत्य होहु हरि शपथ पायके, राम दूत धरु मारु जाय के ।

जय जय जय हनुमन्त अगाधा, दु:ख पावत जन केहि अपराधा ।
पूजा जप तप नेम अचारा, नहिं जानत हौं दास तुम्हारा ।
वन उपवन मग गिरि गृह माहीं, तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ।
पांय परौं कर जोरि मनावौं, येहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।

जय अंजनि कुमार बलवन्ता, शंकर सुवन वीर हनुमन्ता ।
बदन कराल काल कुल घालक, राम सहाय सदा प्रतिपालक ।
भूत, प्रेत, पिशाच निशाचर, अग्नि बेताल काल मारी मर ।
इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की, राखउ नाथ मरजाद नाम की ।

जनकसुता हरि दास कहावो, ताकी शपथ विलम्ब न लावो ।
जै जै जै धुनि होत अकासा, सुमिरत होत दुसह दु:ख नाशा ।
चरन शरण कर जोरि मनावौं, यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।
उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई, पांय परौं कर जोरि मनाई ।

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता, ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ।
ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल, ॐ सं सं सहमि पराने खल दल ।
अपने जन को तुरत उबारो, सुमिरत होय आनंद हमारो ।
यह बजरंग बाण जेहि मारै, ताहि कहो फिर कौन उबारै ।

पाठ करै बजरंग बाण की, हनुमत रक्षा करै प्राण की ।
यह बजरंग बाण जो जापै, ताते भूत-प्रेत सब कांपै ।
धूप देय अरु जपै हमेशा, ताके तन नहिं रहै कलेशा ।

॥ दोहा ॥

प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान ॥

श्री हनुमान बजरंग बाण के पाठ की सही विधि

  • मंगलवार के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मंगलवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
  • सबसे पहले अपने पूजा स्थल पर श्री हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कीजिए।
  • बजरंग बाण पाठ से पहले श्री गणेश का उच्चारण करे।
  • इसके बाद श्री राम जी और माता सीता का ध्यान करे।
  • उसके बाद हनुमान जी को प्रणाम करके बजरंग बाण के पाठ का संकल्प लें।
  • हनुमान जी को सबसे पहले फूल अर्पित कर धूप, दीप जलाएं।
  • कुश से बना आसन बिछाएं और उसपर बैठकर बजरंग बाण का पाठ आरंभ करें।
  • पाठ पूर्ण हो जाने के बाद भगवान राम का स्मरण और कीर्तन करें। 
  • हनुमान जी को प्रसाद के रूप में चूरमा, लड्डू और अन्य मौसमी फल आदि अर्पित कर सकते हैं। 

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बजरंग बाण पाठ का उचित समय क्या है?

इस पाठ को मंगलवार के दिन करना करना शुभ माना जाता है क्योंकि यह दिन हनुमान जी को समर्पित है। पाठ की शुरुआत करने से पहले स्नान कर अच्छे वस्त्र धारण कर ले तथा पूजा स्थल पर हनुमान जी की मूर्ति को स्थापित करें। श्री गणेशाय करे सीता का ध्यान कर मूर्ति को धूप दिया तथा फल अर्पित करे और बजरंग बाण का पाठ करना शुरू दे।

Bajrang Baan में कितनी चौपाई तथा दोहे हैं?

बजरंग बाण में 32 चौपाइयां और 2 दोहे है।

बजरंग बाण पाठ के क्या-क्या लाभ हैं?

इस पाठ को शास्त्रों में बहुत ही प्रभावशाली माना गया है। क्योंकि इस पाठ का मंगलवार को जाप करने से हनुमान जी की कृपा बनी रहती है क्योंकि हनुमान जी को संकट मोचन कहा जाता है, इसलिए बजरंग बाण का पाठ करने से कुंडली में मौजूद मंगल दोष तथा शत्रु भय से छुटकारा मिलता है। इस पाठ को केवल विशेष स्थिति में किया जाता है सामान्य स्थिति में नहीं, इस पाठ को हनुमान जी की शक्ति तथा ऊर्जा का स्रोत भी माना जाता है।

इस पाठ का जाप करते समय क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

माना जाता है कि बजरंग बाण का प्रयोग हर जगह नहीं करना चाहिए या नहीं जब व्यक्ति पर घोर संकट हो तभी इसका प्रयोग करें। लेकिन प्रयोग करने से पहले आपको इसे सिद्ध करना होगा। पाठ को करते समय कोई भी त्रुटि नहीं हो यानी उच्चारण स्पष्ट हो यह ध्यान अवश्य रखें। जितनी बार आप बजरंग बाण का संकल्प ले इतनी बार ही रुद्राक्ष माला का पाठ करें। यदि आप किसी इच्छा के लिए इस बार को कर रहे हैं तो 41 दिनों तक इस पाठ को नियम पूर्वक करें।

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