गरुड़ पुराण | Garuda Purana PDF in Hindi

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गरुड़ पुराण (Garuda Purana) को सभी पुराणों में सबसे महत्वपूर्ण पुराण माना जाता है क्योंकि यह माना जाता है कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है और उसके बाद यदि गरुड़ पुराण के पाठ को किया जाता है तो उस व्यक्ति को वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है.

गरुड़ पुराण के लेखक वेद व्यास जी हैं जिन्होंने इसे संस्कृत भाषा में लिखा है यह वैष्णव ग्रंथ का एक प्रकार है जिसमें विष्णु भक्ति के बारे में बताया गया है वैसे तो हिंदू धर्म में 18 पुराण प्रसिद्ध है लेकिन गरुड़ महापुराण उनमें अपना विशेष महत्व रखता है क्योंकि यहां पुराण भगवान विष्णु से संबंधित है.

इस पुराण में विष्णु भगवान के बारे में विस्तार से वर्णन किया है साथ ही भगवान विष्णु के 24 अवतारों के बारे में बताया गया है।

गरुड़ पुराण के बारे में संपूर्ण जानकारी

वैसे तो गरुड़ पुराण में लगभग 19000 श्लोक है लेकिन वर्तमान समय में लगभग 8000 श्लोक ही मिलते हैं गरुड़ महापुराण को दो भागों में बांटा गया है –

  1. पूर्व खंड
  2. उत्तरखंड

पूर्व खंड में लगभग 229 अध्याय बताए गए हैं जबकि उत्तरखंड में अध्यायों की संख्या 34 से लेकर 49 तक बताई गई है बताया जाता है कि गरुड़ पुराण की रचना अग्नि पुराण के बाद भी है पहले भाग में विष्णु भक्ति से संबंधित तथा उपासना की विधियों के बारे में उल्लेख किया गया है साथ ही मृत्यु के उपरांत गरुड़ पुराण के श्रवण के प्रावधान के बारे में बताया गया है यदि बात करें दूसरे भाग में तो इसमें मनुष्य की मृत्यु के बाद उसकी क्या गति होती है के बारे में बताया गया है।

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गरुड़ पुराण संपूर्ण कथा –

गरुड़ पुराण कथा को निम्नलिखित पदों में बताया गया है –

पूर्वखण्ड – इस खंड को आचार खंड भी कहते हैं इसमें सृष्टि का वर्णन किया गया है इसके अलावा इसमें विष्णु भगवान जी की पूजा आराधना के बारे में बताया गया है।

उत्तरखण्ड – इस खंड को प्रेतकल्पा भी कहते हैं इसमें कुल 35 अध्याय हैं इसमें मृत्यु तथा इसके बाद व्यक्ति की अवस्था तथा अंतिम समय में किए जाने वाले क्रिया कृत्य का वर्णन किया है इसके अलावा इसमें मनुष्य की मरने के बाद क्या गति होती है को बताया गया है।

नरक यात्रा – इसमें नरक की यात्रा बताई गई है तथा अपने जीवन के आधार पर कर्म फल मिलेगा के बारे में बताया है।

प्रेत योनि से बचने के उपाय – गरुड़ पुराण में प्रेत योनि और नरक से बचने के समाधान भी दिए गए हैं जिनका आप प्रयोग करके नरक की यात्रा से बच भी सकते हैं।

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