हरियाली तीज 2022 | Hariyali Teej Vrat Katha, Puja Vidhi in HIndi

भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में Hariyali Teej भी शामिल है कुछ लोग हरियाली तीज को श्रावणी तीज भी कहते हैं, आज हम इस पोस्ट के माध्यम से आपके साथ Hariyali Teej Vrat Katha pdf एवं Puja Vidhi शेयर करने वाले हैं।

इस तीज को उत्तर भारत के कुछ प्रमुख राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार एवं झारखंड में महिलाओं द्वारा बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार हरियाली तीज त्यौहार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, जो कि आमतौर पर नाग पंचमी से 2 दिन पहले आती है।

इस दिन पर महिलाएं द्वारा निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव तथा माता पार्वती की विशेष रूप से पूजा तथा आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के आधार पर माने तो इस दिन भगवान शंकर ने माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। हिंदू धर्म ग्रंथों के आधार पर श्रावण महीने को पवित्र महीना माना जाता है जो कि भगवान शिव तथा देवी पार्वती को समर्पित है तथा विभिन्न उपवासों का पालन करने का पवित्र महीना है।

हरियाली तीज पर नवविवाहित लड़कियों के ससुराल से आभूषण, मिठाई, मेहंदी भेजी जाती है तथा महिलाएं नए-नए वस्त्र पहनती हैं एवं सोलह सिंगार श्रृंगार करती हैं। तथा भगवान शंकर एवं माता पार्वती से सुखी विवाहित जीवन के लिए प्रार्थना करते हैं।

हरियाली तीज पूजा विधि

यह व्रत भी करवा चौथ की तरह निर्जल व्रत है लेकिन इसकी पूजा ज्यादा लंबी नहीं है। क्योंकि यह व्रत भगवान शिव तथा माता पार्वती को समर्पित है तो इस दिन केवल शिव तथा पार्वती की पूजा की जाती है।

  • व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के पश्चात साफ वस्त्र धारण कर लें।
  • अब अपने घर के पूजा स्थल की सफाई करके व्रत की तैयारी करें।
  • इसके बाद स्वच्छ मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती एवं गणेश जी की प्रतिमा को तैयार करें।
  • क्योंकि किसी भी पूजा का आरंभ भगवान गणेश जी की आरती से होता है तो इसलिए सबसे पहले भगवान गणेश जी की आराधना करें।
  • फिर महादेव तथा माता पार्वती की आराधना करें।
  • इसके पश्चात माता पार्वती जी को श्रृंगार अर्पित करें तथा भगवान शंकर को वस्त्र भेंट करें।
  • अंत में महिलाएं तीज व्रत की कथा पढ़ें या सुने।

कथा के समापन पर महिलाएं मां पार्वती से पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं, इस दिन घर पर उत्सव मनाया जाता है भजन नृत्य आदि किए जाते। तथा हरे वस्त्र, हरि चुनरी, हरा लहरिया, हरा श्रृंगार, मेहंदी तथा झूला झूलने का भी रिवाज है। 

Hariyali Teej कब है?

इस वर्ष हरियाली तीज का त्यौहार सावन माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी 31 जुलाई 2022 रविवार को सुबह 6 बजकर 32 मिनट से शुरू होगी। जो भी महिलाएं पूजा करना चाहती हैं वह 6:32 से लेकर  8:30 तक पूजा कर सकते हैं।  प्रदोष काल के लिए पूजा का मुहूर्त शाम 6:30 से लेकर रात 8:50 तक रहेगा।

  • हरियाली तीज – रविवार, जुलाई 31, 2022 को
  • तृतीया तिथि प्रारम्भ – जुलाई 31, 2022 को सुबह 02 बजकर 59 मिनट पर शुरू
  • तृतीया तिथि समाप्त – अगस्त 01, 2022 को सुबह 04 बजकर 18 मिनट पर खत्म
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हरियाली तीज व्रत कथा (Vrat Katha)

यह कथा भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को उनके पूर्व जन्म का स्मरण कराने के लिए सुनाई गई थी, भगवान शिव कहते है – है पार्वती! तुम्हारे द्वारा बाल्यावस्था में बारह वर्षों तक गिरिराज हिमालय पर स्थित गंगा के तट पर मुझे वर के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी, तुमने अन्नजल त्याग दिया था तथा खाने के रूप में पेड़ के सूखे पत्ते खाए सर्दी गर्मी बरसात में कष्ट सहे।

तुम्हारे पिता यह देख कर बहुत दुखी थे। देव ऋषि नारदजी तुम्हारे घर पर पधारे और कहा मैं विष्णु जी के कहने पर यहां आया हूं वह आपकी कन्या से प्रसन्न होकर उनसे विवाह करना चाहते हैं। कृपया अपनी राय बताएं।

पर्वतराज यह समाचार सुनकर अत्यंत प्रसन्न हो गए और तुम्हारा विवाह विष्णु जी से करने के लिए तैयार हो गए। और फिर नारद जी ने यह शुभ समाचार विष्णु जी को सुना दिया और जब तुम्हें यह पता चला तो तुम्हें बहुत दुख हुआ क्योंकि तुम मुझे मन से अपना पति मान चुकी थी।

तुम्हारी एक सखी ने तुम्हारी इस मानसिक दशा को समझ लिया और उसने तुमसे उस विक्षिप्तता का कारण जानना चाहा। फिर तुमने उसे बताया कि मैंने सच्चे मन से भगवान शिव का वरण कर लिया है, किंतु मेरे पिताजी ने मेरा विवाह विष्णु जी से कराने का निश्चय किया है। जिस कारण से मैं धर्म संकट में पड़ गई हूं। अब मैं क्या करूं? मेरे पास अपने प्राण त्याग देने के अतिरिक्त कोई भी उपाय शेष नहीं बचा।

तुम्हारी सखी बहुत ही समझदार थी। उसने कहा – प्राण त्यागने का कारण ही क्या है? संकट के समय धैर्य से काम लेना चाहिए नारी जीवन की सार्थकता इसी में है कि पति रूप में हृदय से जिसे एक बार स्वीकार कर लिया है, जीवन भर उसी से निर्वाह करें। क्योंकि सच्ची आस्था एवं एक निष्ठा के समक्ष भगवान को भी समर्पण करना पड़ता है। मैं तुम्हें एक घनघोर जंगल में ले चलती हूं जहां साधना स्थली भी हो और जहां तुम्हारे पिता तुम्हें खोज भी न पाए। उस जंगल में तुम साधना में लीन हो जाना मुझे विश्वास है कि ईश्वर तुम्हारी सहायता अवश्य करेंगे।

तुमने फिर अपनी सखी की बात मान ली और तुम घनघोर जंगल में चली गई। तुम्हारे पिता तुम्हें घर पर ना पाकर बहुत चिंतित हुए। वह सोचने लगे कि मैं उसका विवाह विष्णु जी के साथ करने का प्रण ले चुका हूं। यदि विष्णु जी बारात लेकर आये और उन्हें पता चला कि कन्या घर पर नहीं है तो बड़ा अपमान होगा और मैं तो कहीं भी मुंह दिखाने योग्य नहीं रहूंगा।

यह सब सोचकर पर्वतराज ने जोर शोर से तुम्हारी खोज शुरू करवा दी। लेकिन तुम अपनी सखी के साथ नदी के तट पर एक गुफा में मेरी आराधना में लीन थी। भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र था उस दिन तुमने रेत के शिवलिंग का निर्माण करके व्रत किया और रात भर मेरी स्तुति गाकर जागती रही। तुम्हारी इस कष्ट साध्य तपस्या के प्रभाव से मेरा आसन डोलने लगा और मेरी समाधि टूट गई। और मैं तुम्हारे समक्ष प्रकट हुआ और तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न होकर तुमसे वरदान मांगने को कहा।

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अपनी तपस्या के फलस्वरूप मुझे समक्ष पाकर तुमने कहा कि मैंने आपको ह्रदय से अपना पति के रूप में वरण कर लिया है। यदि आप मेरी तपस्या से प्रसन्न होकर यहां आए हैं तो आप भी मुझे अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार कर लीजिए। और मैं तथास्तु कहकर कैलाश की ओर लौट चला।

सुबह होते ही तुमने पूजा की सभी सामग्री को नदी के जल में प्रवाहित कर दिया और सहेली सहित व्रत का पारणा किया। उसी समय पर्वतराज अपने मित्र बंधुओं के साथ तुम्हें ढूंढते हुए वहां पहुंचे और तुमसे इस कष्ट साध्य तपस्या का कारण पूछा। तुम्हारी यह दशा देखकर गिरिराज बहुत दुखी हुए और उनकी आंखों से आंसू छलकने लगे। तुमने उनके आंसुओं को पोंछते हुए विनम्र स्वर में कहा पिताजी मैंने अपने जीवन के अधिकांश समय को कठोर तपस्या में बिताया है और मेरी यह तपस्या का उद्देश्य यह है कि मैं शिव जी को अपने पति के रूप में पाना चाहती थी। 

और आज मेरी यह तपस्या पूर्ण हो चुकी है, क्योंकि आप विष्णु जी से मेरा विवाह करने का निर्णय पहले ही ले चुके थे इसलिए मैं अपने आराध्य की खोज में घर छोड़ कर यहां चली आई।अब मैं यहां से आपके साथ एक ही शर्त पर चलूंगी यदि आप मेरा विवाह विष्णु जी से ना करके महादेव जिसे करेंगे। गिरिराज ने पार्वती की बात मान ली और अपने साथ घर ले गए, और कुछ समय पश्चात शास्त्र विधि-विधान पूर्वक द्वारा हमारा विवाह हो गया।

बुरी आदतों का करे त्याग

  1. अपने पति से कभी भी छल कपट न करे 
  2. झूठ व दुर्व्यवहार से दूर हैं और ना ही क्रोध करें
  3. दूसरों की बुराई करने से बचें

इस मंत्र का करे उच्चारण

इस मंत्र का उच्चारण करने से भगवान शिव तथा मां पार्वती प्रसन्न होकर अपने भक्तों को मनचाहा वरदान प्रदान करते हैं।

“गण गौरी शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकर प्रिया। मां कुरु कल्याणी कांत कांता सुदुर्लभाम्।।”

पौराणिक महत्व

हिंदू धर्म ग्रंथों में हर एक पर्व का अपना ही पौराणिक महत्व होता है। और उनसे जुड़ी कुछ रोचक कथाएं भी होती हैं। वैसे ही इस तीज को मनाने के पीछे भी पौराणिक कथा है यह भगवान शिव तथा माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष में मनाया जाता है, माता पार्वती ने शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कड़ी तपस्या और 108वे जन्म के बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। माना जाता है कि श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को शंकर जी ने माता पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकारा था। और तभी से मान्यता चली आ रही है कि भगवान शंकर एवं माता पार्वती ने इस दिन को सुहागन स्त्रियों के लिए सौभाग्य का दिन होने का वरदान भी दिया था। इसलिए हरियाली तीज पर शंकर जी और माता पार्वती की पूजा करने से विवाहित स्त्रियां सौभाग्यवती रहती हैं एवं घर में सुख समृद्धि आती है।

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