Karagre Vasate Lakshmi Mantra PDF

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Download PDF of Karagre Vasate Lakshmi Mantra in Hindi PDF With Meaning प्रातः स्मरण मंत्र Pratah Smaran Mantra Lyrics Hindi

सुबह सबसे पहले उठ कर अपने हाथ को देखकर प्रातः स्मरण Pratah Smaran Mantra Karagre Vasate Lakshmi करने से आपका दिन प्रसन्नता और उमंग से भरा रहता है प्रातः स्मरण करने से सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास होता है तथा अपनी मातृभूमि और राष्ट्र के प्रति भक्ति और प्रेम की भावना बढ़ती है तथा प्रार्थना करने से प्रफुलता, स्फूर्ति , दृढ़ता,उल्लास और उत्साह के साथ अपने कर्तव्य के पद पर बढ़ता हुआ मनुष्य नई नई सफलताएं अवश्य प्राप्त करता है।

आप सुबह उठकर सात आसमान जरूर करें जो कि आपको भविष्य में सफल बनाएगा। प्रातः स्मरण PDF आपको नीचे दिया गया है जहां पर क्लिक करके आप उसे Download कर सकते हैं।

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प्रातः स्मरण मंत्र कराग्रे वसते लक्ष्मी Lyrics in Sanskrit

कराग्रे वसते लक्ष्मी : करमध्ये सरस्वती ।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ॥1॥

karagre vasate lakshmi karamadhye saraswati, Kara-Muule Tu Govindah Prabhaate Kara-Darshanam ||

अर्थ: अर्थात मेरे कर (हाथ) के अग्रभाग में धन की देवी लक्ष्मी का निवास है। वही मध्य भाग में विद्या की देवी सरस्वती बसती है। और हाथों की मूल (हथेली) में भगवान विष्णु का निवास स्थान है। अतः प्रातकाल उठकर में सभी का दर्शन करता हूं। 

Lakshmi, the goddess of wealth, resides in the front of my hands. Saraswati, the goddess of learning resides in the same central part. And at the root of the hands is the abode of Lord Vishnu. That’s why I wake up early in the morning and see everyone.

समुद्रवसने देवि ! पर्वतस्तनमण्डले !
विष्णुपनि ! नमस्तुभ्यं पादस्पर्श क्षमस्व मे ।।2 ।।

ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी
भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च ।
गुरुश्च शुक्र : शनिराहुकेतवः
कुर्वन्तु सर्वे मम सु प्रभातम् ॥3 ॥

सनत्कुमारः सनकः सनन्दनः
सनातनोऽप्यासुरिपिङ्गलौ च ।
सप्त स्वराः सप्त रसातलानि
कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम् ॥4 ॥

सप्तार्णवाः सप्त कुलाचलाश्च
सप्तर्षयो द्वीपवनानि सप्त ।
भूरादिकृत्वा भुवनानि सप्त
कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम् ॥5 ॥

पृथ्वी सगन्धा सरसास्तथाप :
स्पर्शी च वायुर्व्वलनं च तेजः ।
नभः सशब्द महता सहैव
कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम् ॥6 ॥

प्रात : स्मरणमेतद् यो विदित्वादरतः पठेत् ।
स सम्यग् धर्मनिष्ठः स्यात् संस्मृताखण्ड भारतः ॥7 ॥

भारत माता की जय

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