Banaras Talkies by Satya Vyas – बनारस टॉकीज़

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  • Book Name : Banaras Talkies / बनारस टॉकीज़ PDF Book
  • Author : Satya Vyas
  • Publisher : Hind Yugm
  • Edition : First edition (19 January 2015)
  • Language : Hindi
  • Pages : 192 pages
  • Country of Origin : India

[PDF] Download Banaras Talkies (Hindi) pdf by Satya Vyas – बनारस टॉकीज़

बनारस टॉकीज़ साल 2015 का सबसे ज़्यादा चर्चित हिंदी उपन्यास है। साल 2016 और 2017 में भी ख़ूब पढ़े जाने का बल बनाए हुए है। सत्य व्यास का लिखा यह उपन्यास काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्रावासीय जीवन का जो रेखाचित्र खींचता है वो हिंदी उपन्यास लेखन में पहले कभी देखने को नहीं मिला। इस किताब की भाषा में वही औघड़पन तथा बनरासपन है जो इस शहर के जीवन में। सत्य व्यास ‘नई वाली हिंदी’ के सर्वाधिक लोकप्रिय लेखक हैं।

1 review for Banaras Talkies by Satya Vyas – बनारस टॉकीज़

  1. PDF

    वो पुराना दौर था जब मै मुंशी प्रेमचंद की कहानी पढ़ा करता था ..,, दो बैलों की कहानी , आत्माराम और भी बहुत सारी थी । लेकिन जैसे जैसे मै बड़ा होता गया ., हिंदी पुरानी होती गयी ..। कहानियाँ तो हिंदी में अच्छी थी लेकिन आज के हिसाब से वो बस कल्पना ही लगती थी .., अब जो आदमी 4G से जुड़ा हो .., बटन दबाते ही मीलों दूर बात कर ले वो भला कबूतर वाली चिट्ठी को क्या समझ पाएगा । फिर मैंने इंग्लिश किताबें पढ़ना शुरू किया ..! लेकिन ससुरा पूरा लंका दहन हो जाता था लेकिन पता नहीं चल पाता था कि राम कौन रावण कौन ..।
    अब चूँकि कुछ ना कुछ तो पढ़ना ही था तो सोचा एक बार फिर से हिंदी को पढ़ा जाए ..!
    Amazon पर खोजबीन कर रहा था .., तभी #दिल्ली_दरबार और #बनारस_टाकीज़ दिखाई दी ..। पढ़ने वालों ने ख़ूब सराहा हुआ था तो मैंने भी अपना पहला दाँव इन्हीं दो पर लगाने की सोची ..।
    मँगाने से पहले मैंने कल्पना भी नहीं की थी की हिंदी इतनी बदल चुकी होगी ..! दोनो किताबों को पढ़ा तो ऐसा लगा जैसे सब कुछ यहीं कहीं आसपास ही घट रहा हो ..। बनारस टाकीज़ से सबसे पहले बनारस घूमने का मौक़ा मिला और पता लगा की एक लंका यहीं बनारस में भी है । और जब मै पिछले साल बनारस गया तो ऐसा लगा की जैसे मै पहले आ चुका हूँ यहाँ ..।
    भगवानदास होस्टल हो या फिर लंका चौराहा .., सब कुछ अपना सा लगा ..।
    दोनों ही किताबें एक से बढ़ कर एक हैं ..। बस किसी छुट्टी वाले दिन आप फ़ुर्सत निकाल कर बैठ जाइये और ख़त्म कर के ही उठिये क्यूँकि इससे पहले तो आप चाह कर भी ना उठ सकोगे ..।
    और हाँ अब तो सर जी की एक और किताब #चौरासी भी आ गयी है वो भी साथ में ही मँगा लीजिएगा ..।

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