Sharirik Shiksa Ek Samagra Adhyayan (Hindi)

  • Book Name : Sharirik Shiksa Ek Samagra Adhyayan (Hindi) PDF
  • Author : Dr. Shyam Narayan Singh
  • Publisher : Khel Sahitya Kender;
  • Edition : 2019th edition (1 January 2017); khel sahitya kendra -7/26-Basement, Ansari Road, Darya Ganj, Delhi-110002, Ph:9811088729
  • Language : Hindi
  • Hardcover : 1220 pages
  • Country of Origin : India

Description

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2019 Edition Chapter -1 Sharirik shiksha ke sidant avm adhaar (Principles & foundation of physical education) Chapter -2 Khel Manovigyan (Sports Psychology) Chapter-3 Khel Samajshastra (Sports Sociology) Chapter -4 Manoranjan (Recreation) Chapter -5 Swasth avm rog (Health and Disease) Chapter -6 khel, Sharirik kriya avm rachna vigyan (Exercise Physiology and Anatomy) Chapter-7 Khel Chikitsa (Sports Medicine) Chapter -8 yoga Chapter-9 Kinsiology & Biomechanics Chapter -10 Khel Parshikshan (Sports Training) Chapter -11 Test, Measurement & Evaluation Chapter-12 Statistics Chapter -13 Computer Chapter -14 Tournament Chapter -15 Major PDF Notes

Sharirik Shiksa Ek Samagra Adhyayan (Hindi) PDF

किसी भी समाज में शारीरिक शिक्षा का महत्व उसकी युद्धोन्मुख प्रवृत्तियों, धार्मिक विचारधाराओं, आर्थिक परिस्थिति तथा आदर्श पर निर्भर होती है। प्राचीन काल में शारीरिक शिक्षा का उद्देश्य मांसपेशियों को विकसित करके शारीरिक शक्ति को बढ़ाने तक ही सीमित था और इस सब का तात्पर्य यह था कि मनुष्य आखेट में, भारवहन में, पेड़ों पर चढ़ने में, लकड़ी काटने में, नदी, तालाब या समुद्र में गोता लगाने में सफल हो सके। किंतु ज्यों ज्यों सभ्यता बढ़ती गई, शारीरिक शिक्षा के उद्देश्य में भी परिवर्तन होता गया और शारीरिक शिक्षा का अर्थ शरीर के अवयवों के विकास के लिए सुसंगठित कार्यक्रम के रूप में होने लगा। वर्तमान काल में शारीरिक शिक्षा के कार्यक्रम के अंतर्गत व्यायाम, खेलकूद, मनोरंजन आदि विषय आते हैं। साथ साथ वैयक्तिक स्वास्थ्य तथा जनस्वाथ्य का भी इसमें स्थान है। कार्यक्रमों को निर्धारित करने के लिए शरीररचना तथा शरीर-क्रिया-विज्ञान, मनोविज्ञान तथा समाज विज्ञान के सिद्धान्तों से अधिकतम लाभ उठाया जाता है। वैयक्तिक रूप में शारीरिक शिक्षा का उद्देश्य शक्ति का विकास और नाड़ी स्नायु संबंधी कौशल की वृद्धि करना है तथा सामूहिक रूप में सामूहिकता की भावना को जाग्रत करना है। शारीरिक फिटनेस के अंतर्गत दो संबंधित अवधारणाएं होती हैं : सामान्य फिटनेस (स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती की एक स्थिति) और विशिष्ट फिटनेस (खेल या व्यवसायों के विशिष्ट पहलुओं को करने की योग्यता पर आधारित कार्योन्मुखी परिभाषा). सामान्यतः शारीरिक फिटनेस व्यायाम, सही आहार और पर्याप्त आराम के द्वारा हासिल हो जाती है। यह जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। बीते वर्षों में फिटनेस को सामान्यतः बिना अधिक थकान के दिन की गतिविधियों को पूरा करने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता था।

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