शिवजी की आरती | Shiv Aarti Hindi PDF

वैसे तो आप सभी ने कई देवी-देवताओं के नाम सुने होंगे लेकिन हिंदू धर्म में शिव जी (Lord Shiva) का सबसे बड़ा महत्व है और शिवजी को प्रसन्न करने के लिए कई तरीके की विधियाँ, आरती और चालीसा होती है जिन्हें अलग-अलग अवसरों पर बोला जाता है उनमें से एक ओम जय शिव ओंकारा आरती Om Jai Shiv Omkara Lord Shiva Aarti भी है जिसे सबसे ज्यादा बोला जाता है.

LanguageHindi
TypePDF
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यह माना जाता है कि जो इस आरती को बोलता है उसके जीवन की सभी कष्ट दूर हो जाते हैं जिन्हें सभी के जीवन में उत्साह भर देती है तथा शिव जैसा आचरण देती है हालांकि वेद पुराणों में अलग-अलग वर्णन किया जाता है.

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शिवजी की जटा में गंगा, मस्तक पर चंदा, त्रिनेत्र धारी, जिनके गले में सर्पों की माला, शरीर पर भस्म श्रृंगार और व्याघ्र चर्म पहने हुए ऐसे भगवान भोलेनाथ शिव का नित्य प्रतिदिन ध्यान करने उनकी आरती करने उनकी पूजा करने से सृष्टि के सभी मनुष्यों का कल्याण होता है।

हिंदू धर्म में शिवजी का व्रत सबसे ज्यादा प्रचलित है शिवजी का व्रत सबसे ज्यादा सावन के महीने रखा जाता है अर्थात सावन के सभी सोमवार में शिवजी का व्रत रखने की महान धारणा है वैसे भी बहुत बार आप सभी ने सुना होगा कि शिवजी की आरती करने से आप सभी के पास आने वाले सभी तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं.

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और भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों के समस्त कष्ट बड़ी आसानी से दूर कर लेते हैं इसलिए मारा गया है कि अगर आप शिव भगवान shiv shankar के भक्त हैं तो आपके पास किसी भी तरीके की कष्ट और समस्याएं नहीं आएंगी क्योंकि शिव भगवान आपके साथ हैं इसके अलावा भोलेनाथ की आरती (bholenath ki aarti) करने के और भी कई तर्क आपको हिंदू संस्कृति में मिलते हैं.

ओम जय शिव ओंकारा की आरती आपको नीचे दिए गए Link से मिल जाएगी जिस पर क्लिक करके आप PDF File डाउनलोड कर सकते हैं।

Shiv shankar others names are Shambo bola bhandari maheshwar umapati mahadev neelkant har har mahadev bholenath etc.

Om Jai Shiv Omkara Lord Shiva Aarti Lyrics (ॐ जय शिव ओंकारा)

ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥

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शिवजी की आरती करने के लाभ

  • भगवान शिव को जीवन का संचालक माना गया है, जो भी व्यक्ति सच्चे मन से इनकी आरती बोलता है, उसकी हर प्रकार की मनोकामना पूर्ण हो जाती है.
  • खास तौर पर सावन के महीने में यदि आप पूरी श्रद्धा से भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं, तो आपको वांछित फल प्राप्त होता है.
  • कुछ लोग मानते हैं, कि रविवार के दिन आरती करने से शक्ति और सेहत का वरदान मिलता है. तो कुछ लोग मानते हैं, कि सोमवार के दिन भगवान त्रिनेत्रधारी के पूजा पाठ करने से जल्दी सफलता प्राप्त होती है. तो वहीं कुछ लोग ऐसा मानते हैं, कि बुधवार के दिन भोलेनाथ जी की आराधना से दीर्घायु तथा निरोगी होने का वरदान मिलता है.

आरती करने के बाद अवश्य करें इस मंत्र का जाप

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्

सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।

मंत्र का अर्थ कर्पूर के समान वर्ण वाले, करुणा के साक्षात अवतार हैं. जो संपूर्ण सृष्टि के सार हैं, जिन्होंने सांप को हार के रूप में धारण किया हुआ है. जो शिव, माता पार्वती जी के साथ हमेशा मेरे हृदय में निवास करते हैं, उन को मेरा हृदय से नमन है.

महत्व – इस मंत्र का विशेष महत्व है. ऐसी मान्यता है कि जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, तो उस समय भगवान विष्णु जी ने इस मंत्र का गान किया था. यह मंत्र शंकर भगवान को सदैव हमारे मन में वास के लिए है. यही कारण है, कि भगवान शिवजी की आरती के बाद इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है.

Om jai shiv omkara ki aarti आपको नीचे दिए गए Link से मिल जाएगी जिस पर क्लिक करके आप File download कर सकते हैं।

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