दशहरा की कथा | Vijayadashami Dussehra Katha PDF

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PDF NameVijayadashami Dussehra Katha PDF
Size1.3 MB
No of Pages3
LanguageHindi
Sourcewww.PDFNOTES.co

नमस्कार दोस्तों आज की इस पोस्ट में मैं आपको बताने वाला हो कि आखिरकार दशहरा क्यों मनाया जाता है इसके पीछे क्या कहानी है तथा इस दिन क्या हुआ था संपूर्ण जानकारी आपको यहां मिलने वाली है इसके अलावा आपको दशहरा की कथा Dussehra Katha PDF भी मिलने वाला है से आप नीचे दिए गए लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं.

you all can download दशहरा की कथा Vijayadashami Dussehra Katha PDF from the given link below.

विजयदशमी/ दशहरा की कथा (Vijayadashami Dussehra Katha)

दशहरा (Vijayadashami) का त्योहार बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। इस पर्व को विजय दशमी भी कहा जाता है। शारदीय नवरात्रि के समय नौ दिन मां दुर्गा का पूजन करने के बाद दसवें दिन रावण का पुतला बनाकर उसका दहन किया जाता है। इसका कारण और कथा त्रेतायुग से जुड़े हैं। त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया था। श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। ये आदर्शवाद की प्रतिमूर्ति थे। भगवान राम को अपने पिता के दिए हुए एक वचन के कारण 14 वर्ष के वनवास पर जाना पड़ा था। जब राम वन के लिए जाने लगे तो उनके छोटे भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता भी उनके साथ गए। वन में श्रीराम को देखकर लंका के राजा रावण की बहन सूर्पनखा श्रीराम पर मोहित हो गई और उसने श्रीराम के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा।

श्रीराम ने सूर्पनखा को आदरपूर्वक बताया कि वह उनसे विवाह नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने अपनी पत्नी सीता को वचन दिया है कि वह उनके अतिरिक्त किसी और से विवाह नहीं करेंगे। यह कहकर श्रीराम ने सूर्पनखा को लक्ष्मण के पास भेज दिया। लक्ष्मण के पास जाकर सूर्पनखा विवाह करने की हठ करने लगीं तो लक्ष्मण ने उन्हें मना कर दिया। इस पर सूर्पनखा नहीं मानी तो लक्ष्मण ने क्रोधित होकर उसके नाक-कान काट दिए।

रोती हुई सूर्पनखा अपने भाई रावण के पास पहुंची और उसे राम और लक्ष्मण के बारे में बताया। तब रावण ने छल से माता सीता का हरण कर लिया। फिर राम भक्त हनुमान ने माता सीता की खोज की। बहुत समझाने के बाद भी जब रावण माता सीता को ससम्मान श्रीराम के पास भेजने के लिए तैयार नहीं हुआ तो श्रीराम ने उसका वध कर दिया और माता सीता को लंका से वापस ले आए।

श्रीराम ने जिस दिन रावण का वध किया उस दिन शारदीय नवरात्र की दशमी तिथि थी। इसीलिए इस त्योहार को विजयदशमी भी कहते हैं। रावण के बुरे कर्म पर श्रीराम की अच्छाई की जीत हुई इसलिए इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के त्योहार के रूप में भी मनाते हैं। विजयदशमी पर रावण का पुतला बनाकर उसका दहन किया जाता है। रावण के साथ ही उसके बेटे मेघनाथ और भाई कुंभकरण के पुतले का भी दहन किया जाता है।

महाभारत की कथा के अनुसार दुर्योधन ने जुए में पांडवों को हरा दिया था। शर्त के अनुसार पांडवों को 12 वर्षों तक निर्वासित रहना पड़ा, जबकि एक साल के लिए उन्हें अज्ञातवास में भी रहना पड़ा। अज्ञातवास के दौरान उन्हें हर किसी से छिपकर रहना था और यदि कोई उन्हें पा लेता तो उन्हें दोबारा 12 वर्षों का निर्वासन का दंश झेलना पड़ता। इस कारण अर्जुन ने उस एक साल के लिए अपनी गांडीव धनुष को शमी नामक वृक्ष पर छुपा दिया था और राजा विराट के लिए एक ब्रिहन्नला का छद्म रूप धारण कर कार्य करने लगे। एक बार जब उस राजा के पुत्र ने अर्जुन से अपनी गाय की रक्षा के लिए मदद मांगी तो अर्जुन ने शमी वृक्ष से अपने धनुष को वापिस निकालकर दुश्मनों को हराया था।

एक अन्य कथानुसार जब भगवान श्रीराम ने लंका की चढ़ाई के लिए अपनी यात्रा का श्रीगणेश किया तो शमी वृक्ष ने उनके विजयी होने की घोषणा की थी।

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