Do Bailon Ki Katha | Munshi Premchand

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लेखक बताता है कि झूरी नामक किसान के पास हीरा और मोती नाम के दो सुंदर, बलवान बैल थे। दोनों में गहरी दोस्ती थी और सभी तरह के काम साथ-साथ ही करते थे। दोनों एक-दूसरे पर विश्वास करते थे और एक-दूसरे से मूक-भाषा में बातें भी करते थे। एक बार झूरी का साला गया बैलों को अपने घर ले जाता है। बेलों को लगा कि उनको बेच दिया गया है। वे गया को पूरे रास्ते परेशान करते हैं। वे मन ही मन झूरी के विषय में सोच रहे थे। शाम के समय वे अपने स्थान पर पहुंचे वहाँ उन्हें सब कुछ पराया लग रहा था। भूखे होते हुए भी उन्होंने कुछ नहीं खाया। रात के समय वे अपनी रस्सियाँ तोड़कर झूरी के घर वापस लौट आए। झूरी उन्हें देखकर बहुत खुश होता है। लेकिन झूरी की पत्नी उन्हें नमकहराम कहती है। झूरी कहता है कि उनको चारा-दाना नहीं दिया होगा। ताव में आकर झूरी की पत्नी ने पशुओं की देख-रेख करने वाले को कहा कि इन्हें केवल सूखा भूसा दिया जाए। वैसा ही किया गया। झूरी की भी बात नौकरी नहीं मानता।

पूरी कहानी को जानने और समझने के लिए आप नीचे दिये गए डाउनलोड का बटन पर क्लिक कर सकते हैं। Download Complete Chapter-1 PDF from the below Link.

Name of PDFDo Bailon Ki Katha
WriterMunshi Premchand
LanguageHindi
Total Pages22
Size of PDF0.4 MB
Sourcencert.nic.in

Do Bailon Ki Katha PDF by Munshi Premchand


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