कक्षा 8 हिंदी व्याकरण | Hindi Vyakaran Class 8 PDF

आज हम कक्षा आठवीं में पढ़ने वाले छात्रों के लिए कक्षा 8 हिंदी व्याकरण Hindi Vyakaran Class 8 PDF की किताब लेकर आए हैं जो कि आपके सामान्य व्याकरण ज्ञान को और भी अधिक मजबूत करेगा, आप इसे नीचे दी गई पीडीएफ के माध्यम से डाउनलोड कर सकते हो।

किसी भी भाषा का व्याकरण पढ़ने से पहले हमें व्याकरण की परिभाषा को जानना बहुत जरूरी है व्याकरण की परिभाषा के अनुसार “ व्याकरण वह शास्त्र होता है जो भाषा की शुद्ध जानकारी प्रदान करता है तथा उसे शुद्ध उच्चारित रूप में लिखने पढ़ने एवं समझने की विधि को बतलाता है” 

अर्थात “वह शास्त्र जो किसी भाषा को शुद्ध रूप में लिखने, बोलने तथा पढ़ना सिखाता है ऐसे शास्त्र को व्याकरण कहते हैं।”

वर्ण

हिंदी भाषा की लिपि देवनागरी है, देवनागरी के वर्णमाला में कुल 52 वर्ण हैं जिनमें 11 स्वर तथा 33 व्यंजन एवं एक अनुस्वार और एक विसर्ग सम्मिलित हैं, इसके अतिरिक्त वर्णमाला में दो द्विगुण व्यंजन और तथा चार संयुक्त व्यंजन मौजूद हैं।

स्वर

हिन्दी भाषा में कुल 12 स्वर हैं जो मूल रूप से उपस्थित हैं और वे बगल की सारणी में निम्नलिखित हैं।

मूल स्वर — ये ऐसे स्वर हैं जो एक ही स्वर से बने हैं।

  • अ, इ, उ, ओ

संयुक्त स्वर — ये ऐसे स्वर हैं जिन्हें संस्कृत भाषा में दो मूल स्वर के मेल की तरह उच्चारित किया जाता था। मगर आधुनिक हिंदी में इन्हें तकनिकी रूप से मूल स्वर ही कहा जाएगा क्योंकि हिंदी में इनका उच्चारण मूल स्वरों में बदल गया है।

  • आ = अ + अ
  • ऐ = अ + इ
  • औ = अ + उ
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हिंदी व्याकरण के बारे में (About Hindi Vyakaran Book Class 8)

वर्तमान शिक्षा प्रणाली की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई श्रृंखला की सरलतम प्रस्तुति आपके समक्ष है। यह शृंखला भाषा के बदलते प्रारूप और सी०बी०एस०ई० के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुरूप तैयार की गई है। भाषा क्या है, यह कैसे और क्यों बनी ? इस प्रक्रिया को इस श्रृंखला में सरल, सहज एवं बोधगम्य विधि से स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है। व्याकरण नीरस और जटिल विषय है। यह श्रृंखला इस अवधारणा को खत्म करने का एक प्रयास है। इस श्रृंखला की पुस्तकों में छोटे-छोटे उदाहरण जो हमारी जिंदगी के हिस्से हैं, से हम व्याकरण के विषय अधिक सरलता एवं सहजता से समझ सकते हैं। उनको जटिल एवं कठिन परिभाषाओं में बाँधना भाषा को कठिन बनाता है।

इस श्रृंखला में व्याकरण को उसके सैद्धांतिक रूप की जटिलता से दूर रखा गया है और इसे सरल एवं व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया गया है। पाठ में सीखे गए बिंदुओं को ‘एक बार फिर से’ में पुनः दोहराया गया है। किसी नियम की आंतरिक जटिलता की समझ को ‘विशेष’ द्वारा स्पष्ट किया गया है। विषय का पर्याप्त अभ्यास ‘स्वयं करके ‘देखिए’ के अंतर्गत करवाया गया है।

विषय सूची

  • भाषा विचार
  • वर्ण-विचार और उच्चारण
  • संधि
  • शब्द-विचार 
  • शब्द भंडार
  • उपसर्ग, प्रत्यय एवं समास
  • संज्ञा 
  • लिंग, वचन और कारक सर्वनाम
  • अध्ययन प्रश्न पत्र-1 
  • विशेषण
  • क्रिया  
  • काल 
  • वाच्य 
  • अविकारी शब्द पद परिचय
  • वाक्य विचार 
  • अशुद्ध वाक्यों का संशोधन 
  • पदबंध एवं उपवाक्य 
  • वाक्य परिवर्तन एवं संश्लेषण 
  • विराम चिह्न 
  • सजावट 
  • मुहावरे और लोकोक्तियाँ 
  • अपठित बोध 
  • अध्ययन प्रश्न-पत्र 2
  • कार्य पत्रिकाएँ
  • कार्य पत्रिका-उत्तरावली
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