नाग पंचमी 2023 | Nag Panchami Vrat Katha, Puja Vidhi in Hindi

नमस्कार दोस्तों आज मैं आप सभी के साथ Nag Panchami Vrat Katha pdf and Puja Vidhi, Samagri List Share करने वाला हूं. नीचे दिए गए लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं।

नाग पंचमी भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक है यह भारत नेपाल के अलावा अन्य देशों में भी हिंदू धर्म के लोगों द्वारा मनाया जाता है, इस दिन नागों की पूजा की जाती है। Nag Panchami श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को यह पर्व मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से नाग देवता को समर्पित होता है. इसलिए इस दिन विशेष प्रकार की पूजा की जाती है, जिससे नाग देवता प्रसन्न हो जाते हैं।

नाग पंचमी की व्रत कथा (Nag Panchami Vrat Katha)

नागपंचमी कथा-1

एक बार की बात है, किसी गांव में एक किसान रहता था, उसके दो बेटे तथा एक बेटी थी।

एक दिन जब किसान अपने दोनों बेटों के साथ खेत में हल चला रहा था, तो गलती से किसान ने एक नागिन के अंडों को कुचल दिया तथा सभी अंडे नष्ट हो गए।

उस वक्त नागिन खेत में मोजूद नहीं थी जब नागिन खेत में आई तो उसने देखा कि किसी ने उसके अंडे तोड़ दिए, वह बहुत गुस्सा हुई और उसने किसान से बदला लेने की ठान ली।

कुछ समय बाद जब किसान के दोनों बेटे घर पर थे. तो उस समय नागिन ने उन दोनों को डस लिया,  जिससे उन दोनों भाइयों की मौत हो गई।

क्योंकि उस समय किसान की बेटी वहां नहीं थी इसलिए नागिन उसे डस नहीं पाई।

लेकिन अगले ही दिन जब नागिन फिर किसान के घर गई, तो उसने देखा कि किसान की बेटी ने उसके सामने एक कटोरी में दूध रख दिया और उससे माफी मांगने लगी।

इस प्रकार के रवैया को देखकर नागिन प्रसन्न हो गई और उसने उसकी दोनों भाइयों को जीवित कर लिया।

यह घटना श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हुई थी इसलिए इस दिन से लगातार हर वर्ष नाग पंचमी मनाई जाती है।

नागपंचमी कथा-2

पुराने समय की बात है एक सेठ के 7 पुत्र थे। जिनमें से सातों भाइयों के विवाह हो चुके थे। सबसे छोटे भाई की पत्नी बहुत ही चरित्रवान एवं सुशील थी, लेकिन उसका कोई भी भाई नहीं था।

1 दिन उनमें से सबसे बड़ी बहू ने घर को लीपने के लिए मिट्टी लाने सभी बहुओं को साथ चलने को कहा वे सभी धलिया और खुरपी लेकर मिट्टी खोदने चले गए।

तभी उनके सामने एक सर्प आ निकला, और बड़ी बहू खुरपी से सर्प को मारने लगी,  यह देखकर छोटी बहू ने उसे रोकते हुए कहा – ‘ इसे मत मारो? इसका कोई अपराध नहीं।’

यह सुनकर बड़ी बहू ने सर्प को नहीं मारा और सर्प दूसरी जगह पर जाकर बैठ गया। तब सबसे छोटी बहू ने   सांप से कहा हम अभी लौट कर आते हैं तुम यहां से मत जाना। यह कहकर वह सबके साथ मिट्टी लेकर घर चली गयी और वहां कामकाज में फस कर सर्प से जो वादा किया था उसे भूल गई।

जब अगले दिन उसे यह बात याद आई कि उसने सर्प से वादा किया है तो वह सबको साथ में लेकर वहां पहुंच गई और सांप को वहां बैठा देखकर बोली – सर्प भैया नमस्कार,  सर्प ने कहा तू मुझे भैया कह चुकी है इसलिए तुझे छोड़ देता हूं, नहीं तो झूठी बात कहने पर मैं तुझे अभी डस लेता। उसने फिर कहा भैया मुझसे भूल हो गई,  मैं आपसे क्षमा मांगती हूं,  फिर सर्प ने कहा –  अच्छा ठीक है आज से तू मेरी बहन हुई और मैं तेरा भाई। तुझे जो भी चीज चाहिए वह मांग ले। वह बोली भैया मेरा कोई नहीं है, अच्छा हुआ तू मेरा भाई बन गया।

See also  Mahishasura Mardini Stotram PDF

समय बीतता गया और एक दिन वह सर्प मनुष्य का रूप रखकर छोटी बहू के घर चला गया और उसने घरवालों से कहा ‘मेरी बहन को भेज दो।’ लेकिन सब ने कहा कि ‘इसका तो कोई भाई नहीं है’ तो सर्प बोला मैं दूर के रिश्ते का भाई हूं, बचपन से ही बाहर चला गया था। उसके विश्वास दिलाने से घर वालों ने छोटी बहू को उसके साथ भेज दिया, मार्ग में चलते हुए सर्प ने बताया कि मैं वही सर्प हूं इसलिए तू डरना मत जहां चलने में तुम्हें कठिनाई होती है वहां मेरी पूछ पकड़ लेना। फिर वह उसके घर पहुंच गई , वहां की धन दौलत को देखकर वह चकित रह गई।

एक दिन सर्प की माता ने उससे कहा – ‘मैं किसी काम के लिए बाहर जा रही हूं’  तुम अपने भाई को ठंडा दूध पिला देना। वह यह बात भूल गई और उसने उसे गर्म दूध पिला दिया, जिस कारण सर्प का मुंह जल गया। यह देख कर सर्प की माता बहुत ही क्रोधित हुई। परंतु सर्प के समझाने पर वह शांत हो गई। तब सर्प ने कहा कि बहन का घर जाने का समय आ गया है।  तो सर्प के पिता तथा सर्प ने उसे बहुत हीरे जवाहरात सोना चांदी एवं वस्त्र उसके घर पहुंचा दिए।

यह सभी धन देकर उसकी बड़ी बहू ने ईर्ष्या से कहा – भाई तो बड़ा धनवान है, तुझे तो उससे और भी धन लेना चाहिए था। जब सर्प ने यह सुना तो उसने सब वस्तुएं सोने की लाकर उसे दे दी, यह देख कर बड़ी बहू ने कहा कि – इन्हें झाड़ने के लिए झाड़ू भी सोने का ही होना चाहिए ,सर्प ने उन्हें सोने का झाड़ू लाकर दे दिया।

सर्प ने छोटी बहू को उपहार में एक हीरा मणियों का अद्भुत हार गया। जिसकी प्रशंसा उस देश की रानी के कानों में भी पड़ गई और वह राजा से बोली –  ‘सेठ की बहू का सार यहां आना चाहिए।’ तो राजा ने सभी मंत्रियों को हुक्म दिया, तो उन्होंने सेठ जी से जाकर कहा कि ‘ महारानी छोटी बहू का हार पहनेंगी’,  वह उस हार को मुझे दे दो।  सेठ जी ने डर के कारण छोटी बहू का हार मांग कर मंत्रियों को दे दिया।

छोटी बहू को यह बात बहुत बुरी लगी,  और उसने सर्प भाई को याद किया और आने की प्रार्थना की –  भैया मेरा हार रानी द्वारा छीन लिया गया है,  तुम कुछ ऐसा करो कि जब वह उस हार को गले में पहने तो वह सर्प बन जाए और जब वह मुझे लौटा दे तो दोबारा हीरा और मणियों का हो जाए। सर्प ने ऐसा ही किया। जैसे ही रानी ने वह हार पहना वह सर्प बन गया और रानी यह देख कर चीख पड़ी।

यह सब नजारा देखकर राजा ने सेठ के पास खबर भेजी वह तुरंत छोटी बहू को यहां भेजें। सेठ डर के कारण छोटी बहू को लेकर वहां उपस्थित हो गया।  राजा ने छोटी बहू से पूछा – ‘ तूने क्या जादू किया है, मैं तुझे दंड दूंगा’  छोटी बहू ने कहा राजन ! धृष्टता क्षमा कीजिए,  यह हार मेरे गले में  हीरे तथा मणियों का रहता है तथा दूसरे के गले में जाने पर सर्प बन जाता है।  यह सुनकर राजा ने सर्प वाला हार उसे दे दिया और कहा पहन कर बताओ। जैसे ही छोटी बहू ने वह हार पहना तो वह पुनः हीरा तथा मणियों का बन गया।

यह सब देखकर राजा को उसकी बातों का विश्वास हो गया और उसने प्रसन्न होकर उसे बहुत सी मुद्राएं पुरस्कार में दी। छोटी बहू हार समेत घर लौट आई। उसका धन देखकर बड़ी बहू को ईर्ष्या होने लगी और उसने यह सब उसके पति को बता दिया कि छोटी बहू के पास कहीं से धन आया है।

See also  Maha Navami Vrat Puja Vidhi PDF & Pujan Samagri List

यह सब सुनकर उसके पति ने अपनी पत्नी को बुलाया और कहा कि ठीक-ठीक बता कि यह धन तुझे कौन देता है? तब वह सर्प को याद करने लगी। तभी अचानक से वहां सर्प आकर प्रकट हो गया और कहां – ‘यदि मेरी बहन के आचरण पर किसी ने संदेह प्रकट करने की कोशिश की तो मैं उसे खा लूंगा।’ यह सुनकर छोटी बहू का पति बहुत ही प्रसन्न हुआ और उसने सर्प देवता का बहुत ही सत्कार किया। मान्यता है कि तभी से नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है और स्त्रियां सर्प को भाई मानकर उसकी पूजा करती है।

नाग पंचमी की पूजा विधि (Naga Panchami Puja Vidhi)

  • नाग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • उसके बाद घर के दरवाजे कथा पूजा के स्थान पर गोबर से नाग देवता बनाएं।
  • इसके उपरांत व्रत लेने का संकल्प लें।
  • नाग देवता की प्रतिमा के लिए आसन लगाएं।
  • अब पुष्प, जल तथा चंदन का अर्घ्‍य दें।
  • इसके बाद पंचामृत बनाकर नागे की घटना को स्नान कराएं।
  • नाग देवता को लड्डू तथा मालपुए का भोग अवश्य लगाएं।
  • इसके बाद चंदन, दृव्‍य, धूप-दीप, ऋतु फल, हल्‍दी, कुमकुम, सिंदूर, बेलपत्र, आभूषण, पुष्प माला, और पान का पत्ता चढ़ाएं. तथा नाग देवता की आरती प्रारंभ करें।
  • शाम के समय भगवान नाग देवता जी प्रतिमा की पूजा करने के बाद व्रत को पूरा करें तथा फलाहार ग्रहण करें।

नाग पंचमी की पूजा से होने वाले लाभ

  • ऐसा कहा जाता है, कि पूरी श्रद्धा से नाग पंचमी की कथा सुनने वाला व्यक्ति, साथ ही पूरी विधि विधान से पूजा पाठ करने वाले व्यक्ति की कुण्डली में स्थित कालसर्प दोष दूर हो जाते हैं।
  • सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।

नागपंचमी पर्व मनाने का तरीका

हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार इस दिन नाग देवता की सबसे पहले पूजा की जाती है, उसके बाद उन्हें दूध पिलाया जाता है. विभिन्न प्रकार के खेलों का आयोजन किया जाता है, जिसमें पहलवानी कुश्ती आदि सबसे सम्मिलित हैं.

कई गांवों में तो नाग पंचमी का मेला आयोजित किया जाता है. जिसमें विभिन्न प्रकार के पकवान बनाये जाते हैं. खिलौने, वस्तुएँ आदि की दुकानें लगाई जाती है. 

इसके अतिरिक्त घर की बहुएँ मायके जाती हैं, जहाँ उन्हें विभिन्न प्रकार के व्यंजन खिलाये जाते हैं. और बाद में दान दिया जाता है.  भारत के कई राज्यों में नाग देवता के अतिरिक्त पशुओं जैसे गाय, भैस, बैल आदि की भी पूजा की जाती है.

Pujan Samagri (पूजन सामग्री)

  • नाग चित्र या मिट्टी की सर्प मूर्ति
  • लकड़ी की चौकी
  • जल, पुष्प, चंदन
  • दूध, दही, घी, शक्कर, शहद (पंचामृत)
  • लड्डू और मालपुए
  • सूत्र
  • हरिद्रा
  • चूर्ण
  • कुमकुम, सिंदूर
  • बेलपत्र
  • आभूषण, पुष्प माला
  • धूप-दीप
  • ऋतु फल
  • पान का पत्ता
  • कुशा
  • गंध
  • धान
  • लावा
  • गाय का गोबर
  • घी
  • खीर और फल

शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

कृष्ण पक्ष नाग पंचमी 2023 शुभ मुहूर्त

श्रावण मास के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि आरम्भ: 07 जुलाई, सुबह 03 बजकर 12 मिनट से

श्रावण मास के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि अंत: 08 जुलाई, रात्रि 12 बजकर 17 मिनट तक

कृष्ण पक्ष नाग पंचमी 2023: 07 जुलाई 2023, शुक्रवार

आयुष्मान योग: रात 08 बजकर 30 मिनट तक

शुक्ल पक्ष नागपंचमी 2023 शुभमुहूर्त

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि आरम्भ: 21 अगस्त, रात्रि 12 बजकर 21 मिनट से

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि अंत: 22 अगस्त रात्रि 02 बजे तक

शुक्ल पक्ष नाग पंचमी: 21 अगस्त 2023, सोमवार

नागपञ्चमी पूजा मूहूर्त: सुबह 05 बजकर 53 मिनट से सुबह 08 बजकर 30 मिनट तक

Download PDF Now

If the download link provided in the post (नाग पंचमी 2023 | Nag Panchami Vrat Katha, Puja Vidhi in Hindi) is not functioning or is in violation of the law or has any other issues, please contact us. If this post contains any copyrighted links or material, we will not provide its PDF or any other downloading source.

Leave a Comment

Join Our UPSC Material Group (Free)

X