संतोषी माता की आरती | Santoshi Mata Ki Aarti PDF

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Although there are descriptions of many deities in Sanatan Dharma, there are some such deities prevalent in our Hindu society, which are not described in Vedic religious texts, but still they have been considered at the top, Santoshi Mata ji is also the same goddess. One of the deities, Santoshi Mata is considered the most among the local people, if Santoshi Mata blesses us, then that devotee overcomes many types of problems.

वैसे तो सनातन धर्म में अनेक देवी-देवताओं का वर्णन आता है तुम तो हमारे हिंदू समाज में कुछ ऐसे भी देवी देवता प्रचलित है जिनका वर्णन वैदिक धर्म ग्रंथों में नहीं होता है लेकिन फिर भी उन्हें सबसे ऊपर माना गया है संतोषी माता जी भी उन्हीं देवी देवताओं में से एक है संतोषी माता को स्थानीय लोगों में सबसे अधिक माना जाता है अगर संतोषी माता हमारे पे कृपा कर देती हैं तो वह भक्त अनेक प्रकार की समस्याओं को पार कर लेता है।

संतोषी माता को प्रसन्न करने हेतु उनके भक्त अनेक प्रकार के उपाय करते हैं उनमें से संतोषी माता जी की आरती का सबसे अधिक महत्व है ऐसा माना जाता है कि जो देखती संतोषी माता जी की आरती करता है उसके दुख तत्काल ही दूर हो जाते हैं संतोषी माता की आरती चालीसा एवं नियमित व्रत रखने वाला भक्त सदैव खुश रहता है और किसी भी तरीके की समस्याएं पार कर लेता है एवं घर में प्रसन्नता शांति और खुशी बनी रहती है।

इसके अलावा यह भी माना जाता है कि जब आप संतोषी माता का व्रत लेते हैं तो उस दिन आपको किसी भी तरीके की खट्टी चीजें नहीं खानी चाहिए अर्थात आपको खट्टी चीजों से दूरी बनाए रखनी पड़ती है खट्टी चीजें खाने से संतोषी माता नाराज हो जाती है और खट्टी चीज खाने से बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और घर में अशांति आती है और किसी भी तरीके के नुकसान हो सकते हैं इसीलिए इस दिन खट्टा नहीं खाना चाहिए और खट्टी चीजों से बचना चाहिए इसीलिए आप सभी के लिए हमने संतोषी माता की आरती उपलब्ध करवाई है जिसमें आपको एक पीडीएफ फाइल के रूप में संपूर्ण संतोषी माता की आरती मिल जाएगी जिसे आप निम्न दिए गए लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड कर सकते हैं।

Santoshi Mata Ki Aarti Lyrics

जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता।

अपने सेवक जन की सुख सम्पति दाता ।।

जय सन्तोषी माता….

सुन्दर चीर सुनहरी मां धारण कीन्हो।

हीरा पन्ना दमके तन श्रृंगार लीन्हो ।।

जय सन्तोषी माता….

गेरू लाल छटा छबि बदन कमल सोहे।

मंद हंसत करुणामयी त्रिभुवन जन मोहे ।।

जय सन्तोषी माता….

स्वर्ण सिंहासन बैठी चंवर दुरे प्यारे।

धूप, दीप, मधु, मेवा, भोज धरे न्यारे।।

जय सन्तोषी माता….

गुड़ अरु चना परम प्रिय ता में संतोष कियो।

संतोषी कहलाई भक्तन वैभव दियो।।

जय सन्तोषी माता….

शुक्रवार प्रिय मानत आज दिवस सोही।

भक्त मंडली छाई कथा सुनत मोही।।

जय सन्तोषी माता….

मंदिर जग मग ज्योति मंगल ध्वनि छाई।

बिनय करें हम सेवक चरनन सिर नाई।।

जय सन्तोषी माता….

भक्ति भावमय पूजा अंगीकृत कीजै।

जो मन बसे हमारे इच्छित फल दीजै।।

जय सन्तोषी माता….

दुखी दारिद्री रोगी संकट मुक्त किए।

बहु धन धान्य भरे घर सुख सौभाग्य दिए।।

जय सन्तोषी माता….

ध्यान धरे जो तेरा वांछित फल पायो।

पूजा कथा श्रवण कर घर आनन्द आयो।।

जय सन्तोषी माता….

चरण गहे की लज्जा रखियो जगदम्बे।

संकट तू ही निवारे दयामयी अम्बे।।

जय सन्तोषी माता….

सन्तोषी माता की आरती जो कोई जन गावे।

रिद्धि सिद्धि सुख सम्पति जी भर के पावे।।

जय सन्तोषी माता….

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