गणपति अथर्वशीर्ष | Ganpati Atharvashirsha Hindi PDF

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गणपति अथर्वशीर्ष (Ganpati Atharvashirsha) हिंदू धर्म में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध एवं छोटा उपनिषद है यहां संस्कृत भाषा में लिखा गया है यह उपनिषद संपूर्ण रूप से गणपति जी को समर्पित है क्योंकि बुद्धि और सीखने का प्रतिनिधित्व करने वाले देवता गणेश भगवान जी को माना गया है.

इसमें यह बताया गया है कि गणेश भगवान ब्रह्मा के समान है उपनिषद को कुछ अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे गणपति अथर्वशीर्ष, गणपति उपनिषद।

भारत में जब भी कोई त्यौहार आता है तो सबसे पहले गणपति भगवान की पूजा होती है क्योंकि हमें पता है कि विघ्न को दूर करने वाले केवल Ganpati जी हैं।

गणपति अथर्वशीर्ष का इतिहास

इस उपनिषद में गणेश को ब्रह्मा के समतुल्य माना गया है तथा गणपति शब्द का शाब्दिक अर्थ ही होता है “भीड़ का नेता”
वैसे तो लगभग 200 उपनिषद हिंदू धर्म में बताए गए हैं लेकिन उनमें से 108 उपनिषद ही प्रमुख उपनिषद हैं जिनमें Ganpati atharvashirsha को 89वां स्थान पर रखा गया है यह कहा जाता है कि Ganpati atharvashirsha Upanishad 17वीं शताब्दी के मध्य में लिखा गया था।

गणपति अथर्वशीर्ष का महत्व

हिंदू धर्म में गणपति जी को संकट हरने वाला भगवान बताया गया है इसीलिए अगर आप चाहते हैं कि आपके जीवन में गणेश भगवान जी सभी तरीके के विघ्न दूर करें तो आपको गणपति अथर्वशीर्ष कपाट जरूर करना चाहिए क्योंकि इस पाठ को करने से आप में रिद्धि सिद्धि प्राप्त होती है।

Ganpati Atharvashirsha पाठ करने की विधि

गणपति जी का अथर्वशीर्ष पाठ करते समय आपको कुछ सामग्री की जरूरत पड़ती है जैसे कि पुष्पप्, धूप, दीप तथा गणेश भगवान जी की प्रतिमा आदि वैसे यह भी माना जाता है कि लाल रंग गणपति जी को बहुत ज्यादा प्रिय है तो आप लाल रंग के पुष्पों से भगवान की पूजा करें और “ॐ गं गणपतये नम:” मन्त्र का जाप करें इस तरीके से अगर आप विधिवत रूप से गणेश अथर्वशीर्ष का पाठक करते हैं तो आपके जीवन में सभी तरीके के विघ्न दूर हो जाते हैं और आपके घर और जीवन मंगलमय हो जाता है

गणपति अथर्वशीर्ष उपनिषद के सभी श्लोक एवं उसका अर्थ आपको नीचे दिए गए है साथ ही आप इसका PDF भी Download कर सकते हैं।

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