करवा चौथ व्रत कथा | Karva Chauth Vrat Katha PDF

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नमस्कार दोस्तों, आज मैं आप सभी के साथ Karva Chauth Vrat Katha PDF in Hindi साझा करने वाला हूं जिसे आप सबसे नीचे दिए गए लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं

कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व करवाचौथ हैं इस दिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं तथा यह व्रत पति पत्नी के अखंड प्रेम को दर्शाता है इस दिन महिलाएं दिन भर इस व्रत को रखकर रात्रि के समय ईश्वर से पति की दीर्घायु की कामना करती हैं इस दिन चंद्रमा के साथ-साथ शिव पार्वती गणेश और कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है आज के समय में करवा चौथ स्त्री-शक्ति का प्रतीक-पर्व है ।

करवा चौथ व्रत कथा Karva Chauth Vrat Katha

करवा चौथ के व्रत को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं जिनमें से कुछ कथाएं आपको नीचे दी जा रही है

प्राचीन समय में करवा नाम की एक स्त्री अपने पति के साथ एक गांव में रहा करती थी उसका पति एक दिन नदी में स्नान करने गया लेकिन नहाते समय एक मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया जिससे कि वह दुविधा में आ गया और उसने मदद के लिए अपनी पत्नी को पुकारा। उसके बाद करवा भाग कर अपने पति के पास पहुंचे और तत्काल उस मगरमच्छ को धागे से बांध लिया इसका सिरा पकड़कर करवा पति के साथ यमराज के पास तक पहुंच गई तथा तथा करवाने यमराज से उसके पति को वापस करने को कहा बहुत सारे प्रश्न उत्तर के बाद करवा के साहस को देखते हुए यमराज को उसके पति को वापस करना ही पड़ा । यमराज ने जाते समय करवा को सुख समृद्धि के साथ वर भी दिया कि “जो स्त्री इस दिन व्रत करके करवा को याद करेगी उसके पति की रक्षा में स्वयं करूंगा” इस प्रकार करवा ने अपनी पति की रक्षा की तथा इस दिन को हिंदू धर्म में सबसे खास बना दिया । जिस दिन करवा ले अपनी पति की रक्षा की वह दिन कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि थी ।

एक और कथा के अनुसार एक साहूकार के सात लड़के तथा एक लड़की थी सेठानी समेत उसके घर में बहू और बेटी ने करवा चौथ का व्रत रखा था रात्रि के समय उसके भाइयों ने उसके साथ मजाक किया की चांद निकल गया है लेकिन सच बात यह था कि भाइयों ने नगर से बाहर जाकर अग्नि जला दी तथा बाद में अपनी बहन से कहा कि चांद निकल गया है लेकिन बहन ने ने इस बात को सच मान लिया और छलनी से चांद को देखते हुए भोजन कर लिया इस प्रकार व्रत भंग करने से गणेश जी उसे प्रसन्न हो गए था उसका पति सख्त बीमार हो गया तथा सभी प्रकार की बीमारियां उस पर लग गई है
जब उसे बाद में पता चला कि उससे बहुत बड़ी गलती हुई है तो उसके पश्चात उसने गणेश भगवान जी से क्षमा मांग कर पुनः चतुर्थी के दिन करवा चौथ का व्रत आरंभ कर दिया संपूर्ण श्रद्धा के साथ उसे इसका फल मिला जिससे गणेश भगवान जी भी उस पर प्रसन्न हो गए और उसके पति को ठीक कर दिया इस तरह अगर कोई व्यक्ति छल कपट को त्याग कर श्रद्धा भक्ति से चतुर्थी के दिन करवा चौथ का व्रत देता है तो उसे सभी प्रकार के सुख मिलते हैं ।

करवा चौथ व्रत कथा | Karva Chauth Vrat Katha PDF

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